Latest Upabhokta Sanrakshan Ke Baaren Main Puri Jankari 2021

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di Aur Upabhokta Sanrakshan Ki Puri Jankari 2021.

दोस्तों आज की इस पोस्ट में हम लाए हैं उपभोक्ता संरक्षण (Upabhokta Sanrakshan) के बारे में विस्तार से पूरी जानकारी जो आपकी महत्वपूर्ण परीक्षाओं में काफी फायदेमंद होगी।

उपभोक्ता संरक्षण (Upabhokta Sanrakshan) –

जो व्यक्ति किसी वस्तु का मूल्य देकर उसे प्राप्त करता है, वहीं उपभोक्ता कहलाता है। इसमें उस व्यक्ति को शामिल नहीं किया जाता है जो कंप्यूटर, फोटोस्टेट आदि के माध्यम से अपनी आजीविका चलाता है, वह उपभोक्ता नहीं कहलाता है। उपभोक्ता का यह अधिकार होता है कि उसने जो मूल्य दिया है उसके बदले उसे अच्छी वस्तु प्राप्त हो।

उपभोक्ता के अधिकार –

संयुक्त राष्ट्र संघ के द्वारा उपभोक्ता के सात अधिकारों को मान्यता दी गई है –

  1. सुरक्षा का अधिकार
  2. शिकायत तथा निवारण का अधिकार
  3. जानकारी प्राप्त करने का अधिकार
  4. क्षतिपूर्ति का अधिकार
  5. उपभोक्ता शिक्षा का अधिकार
  6. वस्तुओं के स्वेच्छा से चयन का अधिकार
  7. स्वस्थ पर्यावरण का अधिकार

जबकि भारत में उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 में उपभोक्ता को छह अधिकार प्रदान किए गए हैं –

  1. सुरक्षा का अधिकार
  2. सूचना पाने का अधिकार
  3. क्षतिपूर्ति का अधिकार
  4. उपभोक्ता शिक्षा का अधिकार
  5. सरकार के द्वारा तय किए गए मूल्य पर वस्तु को प्राप्त करने का अधिकार
  6. सुनवाई का अधिकार

उपभोक्ता के कर्तव्य (Upabhokta ke Kartavy) –

उपभोक्ता को इन अधिकारों को प्राप्त करने के लिए अपने कर्तव्यों का भी पालन करना अति आवश्यक होता है। यहां पर नीचे उपभोक्ता के कर्तव्य के बारे में बताया गया है।

उपभोक्ता को वस्तु को खरीदते समय एगमार्क, आईएसआई आदि मोहर वाले उत्पादों को खरीदना चाहिए।

किसी भी वस्तु को खरीदते समय प्रयोग में लिए गए बाट या माप आपको अच्छी तरीके से देखना चाहिए ताकि खरीदी गई वस्तु का माप तोल पूरा हो।

डिब्बा लेवल वस्तु को खरीदने पर उसके बारे में पूरा पता कर लेना चाहिए जैसे कि शुद्ध वजन, उत्पादक कंपनी का नाम तथा पता, बैंकिंग तिथि तथा उपयोग करने की अंतिम तिथि आदि।

जिन वस्तुओं पर सरकार के द्वारा मूल्य निर्धारित किया गया है, उससे अधिक मूल्य कभी नहीं देना चाहिए।

वस्तु के बारे में गारंटी या वारंटी की शर्तों को अच्छी तरह से समझ लेना चाहिए।

सरकार के द्वारा बनाए गए उपभोक्ता संरक्षण नियम की संपूर्ण जानकारी रखनी चाहिए।

उपभोक्ता संरक्षण कानून (Upabhokta Sanrakshan Kanoon / Act) –

हमारे देश में उपभोक्ताओं के संपूर्ण अधिकारों की रक्षा करने के लिए तथा व्यापारियों के शोषण से बचाने के लिए उपभोक्ता संरक्षण नियम बनाया गया है। यह कानून 24 दिसंबर 1986 को संसद में पास किया गया था, जो 15 अप्रैल 1987 को संपूर्ण भारत में लागू किया गया। इसमें केवल एक ऐसा राज्य जम्मू कश्मीर था, जहां यह कानून लागू नहीं किया।

उपभोक्ताओं की रक्षा करने के लिए राष्ट्रीय स्तर, राज्य स्तर तथा जिला स्तर पर उपभोक्ता मंच गठित किए गए हैं। इन के माध्यम से उपभोक्ता अपने साथ हुए शोषण की शिकायत दर्ज करा सकता है।

उपभोक्ता के द्वारा शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया –

  • उपभोक्ता मूल्य देकर जो वस्तु खरीदी गई है उसके बारे में शिकायत दर्ज करा सकता है।
  • शिकायत करने के लिए उपभोक्ता को किसी भी प्रकार के कोई भी निर्धारित प्रारूप की आवश्यकता नहीं है। अगर उपभोक्ता चाहे तो वह सादे कागज पर भी शिकायत कर सकता है लेकिन उपभोक्ता का लिखा हुआ लेख होना आवश्यक है।
  • उपभोक्ता चाहे तो डाक द्वारा व्यापारी के खिलाफ शिकायत भेज सकता है।
  • शिकायत भेजने के लिए उपभोक्ता को नीचे दिए गए विवरण की आवश्यकता होगी – शिकायतकर्ता का नाम तथा उसका पता शिकायत पत्र में होना चाहिए।
  • शिकायत करने की पुष्टि के लिए प्रमाण होना भी जरूरी है।
  • व्यापारी तथा उत्पादक का संपूर्ण नाम तथा पता भी शिकायत पत्र में लिखा हुआ होना चाहिए।
  • शिकायत किस के बारे में की जा रही है उसकी संपूर्ण जानकारी लिखी होनी चाहिए।
  • शिकायत कर्ता के हस्ताक्षर तथा शिकायत निवारण के बारे में भी लिखा होना चाहिए।

अगर उपभोक्ता अपनी शिकायत जिला मंच पर करते हैं और वहां से संतुष्ट नहीं हो पाते हैं, तो आप अगली शिकायत राष्ट्रीय स्तर पर कर सकते हैं। जहां उपभोक्ता 30 दिन के अंदर न्याय मिल जाएगा। राष्ट्रीय आयोग का कार्यालय दिल्ली में स्थित है। यदि उपभोक्ता जिला मंच या राज्य आयोग के द्वारा दिए गए फैसले से संतुष्ट नहीं होता है, तो वह राष्ट्रीय आयोग में इस फैसले के विरुद्ध भी अपील कर सकता है जहां 30 दिन के अंदर की समीक्षा की जाती है।

वैसे तो उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा करने के लिए राज्य के सभी जिलों में उपभोक्ता सूचना केंद्र बनाए गए हैं। इन सूचना केंद्र पर उपभोक्ता सूचना संरक्षण के नियम के बारे में भली-भांति जान सकता है तथा अपने साथ हुए शोषण की शिकायत भी दर्ज करा सकता है।

इस बात को तो आप सभी जानते हैं कि आज के इस समय में बाजार में व्यापारियों द्वारा वस्तु में मिलावट तथा नापतोल में गड़बड़ी की जाती है। कभी-कभी उपभोक्ता इन नियमों की जानकारी के अभाव में दुकानदार को पूरा पैसा देकर भी अच्छी सामग्री नहीं खरीद पाता है।

इसलिए आप भविष्य में जब भी किसी सामग्री को खरीदते हैं तो उसके बारे में पूरी जानकारी प्राप्त करें तथा व्यापारी से कंप्यूटर के द्वारा बनाए गया बिल प्राप्त करें।

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